बाबा रामदेव जी व ठाकुर अजमाल का इतिहास
ठाकुर अजमाल जी व बाबा रामदेव जी का इतिहास जिन्होने राजस्थान के लोकदेवता बाबा रामापीर के इतिहास व लोक साहित्य का कभी कोई गहन अध्ययन ही नही किया .. वे लोग बाबा रामापीर को केवल अजमल घर अवतारी ( अर्थात किसी पालणे मे प्रकट ) ही मानते है .. जबकि उनका जन्म सायर जी मेघवाल (गोत्र जयपाल ) के घर मां मंगनीदे की कोख से हुआ था .. ठाकुर अजमाल जी के आदेशानुसार ही सायर जी मेघवाल ने अपने नन्हे बालक रामदेव को रहस्यमय ढंग से उनके घर बीरमदेव के पालणे मे सुलाया था ... मध्यकालीन सामंतकाल मे उस समय छुआछुत के कारण ठाकुर अजमाल जी ने उन्हे मेघवंशी न बतलाकर अपने घर पालणे मे प्रकट ही बताया.. क्यो कि ठाकुर अजमाल जी एक सच्चै मानवतावादी संत महापुरुष थे ... उऩ्हे मेघवंशियो से कोई घृणा नही थी .. इसिलिये उन्होने जिवन भर कभी बाबा रामदेव को मेघवालो के घर आने जाने व उन्ही के साथ जम्मा जागरण करने पर कोई ऐतराज नही किया ... जबकि अजमाल जी के भाई धनरूप जी की बेटी सुगणा के ससुराल पुंगलगढ वाले तो इसिलिये बाबा रामदेव से बेहद नफरत करते थे ... ...


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